आपातकालीन हालात में मानसिक स्वास्थ्य की ज़रूरत

आपातकालीन हालात में मानसिक स्वास्थ्य की ज़रूरत
News by: पर पोस्ट: नवम्बर 26, 2025 See: 15

  • संकट के दौरान भावनात्मक व मनो-सामाजिक असर: प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध, महामारी या अन्य मानव-संकट (humanitarian emergencies) में से अधिकांश प्रभावित लोग मानसिक व मनो-सामाजिक कष्ट — जैसे डर, उदासी, अस्थिरता, अकेलापन, असुरक्षा — महसूस करते हैं। World Health Organization+2World Health Organization+2
  • एक में से पांच लोगों पर मानसिक रोगों का असर: ऐसे संकट-ग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 1 में से 5 लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या (जैसे तनाव, अवसाद, PTSD) से जूझ सकते हैं। World Health Organization+2Wikipedia+2
  • पुनर्प्राप्ति (recovery) में मानसिक स्वास्थ्य का रोल: सिर्फ भोजन, पानी या चिकित्सा से ही पूरी बहाली नहीं होती — लोगों को मानसिक शांति, सामाजिक समर्थन और मनो-सहायता भी चाहिए ताकि वे अपने जीवन को फिर से स्थापित कर सकें। यह सामुदायिक बहाली (community recovery) और दीर्घकालीन स्थिरता (long-term resilience) के लिए महत्वपूर्ण है। knowledge-action-portal.com+2CBM Global+2
  • विशेष रूप से बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए संवेदनशीलता: संकट के दौरान बच्चे, किशोर, बुज़ुर्ग, विकलांग — सभी प्रभावित हो सकते हैं। बच्चों का विकास, शिक्षा, भावनात्मक सुरक्षा एवं उनकी成长 क्षमता संकट के बाद प्रभावित हो सकती है, अगर वे समय पर मानसिक व मनो-सहायता न पाएं। wmhdofficial.com+2UNICEF+2
  • मानव अधिकार और समावेशी पुनर्निर्माण: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल (Mental Health & Psychosocial Support — MHPSS) को सिर्फ वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि एक बुनियादी मानव अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। संकट के बाद राहतार्थी या प्रभावित लोगों को मूलभूत देखभाल के हिस्से के रूप में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। CBM Global+2Red Cross EU Office+2
  • स्वास्थ्य प्रणालियों की मजबूती व समाज की पुनर्रचना: आपदा के दौरान यदि मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न दिया जाए, तो दीर्घकालीन सामाजिक अस्थिरता, सम्बंधों में टूट, आर्थिक व सामाजिक नुकसान की पुनरावृत्ति संभव है। लेकिन अगर समय पर एवं सामुदायिक-आधारित देखभाल हो — तो समाज पुनर्निर्माण के लिए मजबूत बन सकता है। World Health Organization+2CBM Global+2
  • मानसिक स्वास्थ्य “चुपचाप” प्रभावित होती है — अक्सर दिखती नहीं: फोकस अक्सर सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य पर रहता है, लेकिन मानसिक या भावनात्मक आघात — जैसे डर, चिंता, तनाव, अलगाव — लंबे समय तक लोगों की खुशहाली, कार्य-क्षमता और जीवन-गुणवत्ता प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में जागरूकता बढ़ाना और इस विषय पर बात करना पहली ज़रूरत बन जाता है। manthanhospital.in+1

  क्या किया जा सकता है — सुझाव / कार्रवाई

  • आपदा-प्रबंधन में मानसिक व मनो-सामाजिक देखभाल (MHPSS) को अनिवार्य भाग बनाना चाहिए — जैसे राहत किट में सिर्फ भोजन/दवाई नहीं, बल्कि काउंसलिंग, first-aid, सामाजिक-मदद शामिल हो।
  • प्रभावित लोगों — विशेष रूप से बच्चों, वृद्धों, विकलांगों — के लिए समुदाय आधारित सपोर्ट ग्रुप बनाएं, ताकि वे अपनी भावनाएं साझा कर सकें, डर/दुःख कम हो, और वे फिर से फर्क महसूस कर सकें कि वे अकेले नहीं हैं।
  • सरकारी व स्थानीय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और शर्म-मुक्त बनाना — मेडिकल सुविधाओं + परामर्श + समुदाय सहयोग + जागरूकता से।
  • आपातकाल के बाद लंबी अवधि की देखभाल और पुनर्रचना सुनिश्चित करना — सिर्फ राहत देने तक सीमित न रहकर, सामाजिक पुनर्‌मिलन, शिक्षा, रोजगार, सामुदायिक पुनर्रचना पर काम करना।
  • समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर खुली बातचीत बढ़ाना — कलंक (stigma) को हटाना, लोगों को यह समझना कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही वास्तविक और महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

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